करवा चौथ की विस्तृत कथा | Karwa Chauth Ki Kahani in Hindi

भारत भूमि में सदियों से करवा चौथ का व्रत स्त्रियों के लिए अत्यंत पवित्र और आस्था से जुड़ा हुआ पर्व माना जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख और समृद्धि के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं — अर्थात न अन्न ग्रहण करती हैं, न पानी पीती हैं। दिनभर भक्ति, सजधज, सोलह श्रृंगार और कथा-पूजन के साथ यह व्रत किया जाता है।


🌺 कथा का आरंभ — सात भाइयों की प्यारी बहन

बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे। उनके सात पुत्र और एक लाड़ली पुत्री थी — जिसका नाम था वीरावती। वह बहुत ही सुंदर, संस्कारी और सबकी आँखों का तारा थी।

समय बीतने के बाद वीरावती का विवाह एक सुयोग्य वर के साथ हो गया। विवाह के बाद जब पहली बार करवा चौथ का व्रत आया, तो वीरावती ने मन से संकल्प लिया कि वह भी इस व्रत को पूरे श्रद्धा भाव से करेगी।

सुबह सवेरे स्नान कर उसने देवी-देवताओं की पूजा की, करवा चौथ का संकल्प लिया और निर्जला उपवास आरंभ किया। दिनभर वह भगवान शिव-पार्वती की पूजा में लगी रही।


🌸 चाँद का इंतजार और भाइयों की चिंता

दिन बीत गया, शाम हुई लेकिन चाँद का कहीं पता नहीं। वीरावती भूख और प्यास से अत्यंत कमजोर हो गई।
वह बार-बार आसमान की ओर देखती, पर चाँद निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था।

उसकी हालत देखकर उसके सातों भाइयों को बहुत दुख हुआ। वे बोले —
“बहन, अगर चाँद देर से निकला तो तुम बेहाल हो जाओगी।”

सबसे छोटे भाई ने कहा,
“चलो, हम कुछ उपाय करते हैं ताकि हमारी बहन का व्रत खुल जाए।”


🪔 भाइयों का छल और झूठा चाँद

भाइयों ने पास के पीपल के पेड़ के नीचे जाकर एक दीपक जलाया, उसके ऊपर छलनी रखी और कहा —
“देखो बहन! चाँद निकल आया है। तुम व्रत खोल लो, वरना तुम और कमजोर हो जाओगी।”

वीरावती ने जब वह दृश्य देखा तो सच में उसे लगा कि चाँद निकल आया है। उसने बिना कुछ सोचे पूजा की थाली निकाली, “चाँद” को अर्घ्य दिया और पति का नाम लेकर व्रत खोल लिया।

लेकिन जैसे ही उसने पहला कौर मुख में डाला, उसी समय बुरी घटना घट गई —
उसके पति के मुख से रक्त निकलने लगा और वह बिना प्राणों के भूमि पर गिर पड़ा।

वीरावती के होश उड़ गए। वह जोर-जोर से रोने लगी। तभी स्वर्ग से एक आकाशवाणी हुई —

“हे वीरावती! तुमसे व्रत में गलती हुई है। तुमने छलपूर्वक झूठे चाँद को देखकर व्रत तोड़ा है, इसीलिए तुम्हारे पति की यह दशा हुई है।”


🌼 वीरावती का पश्चाताप और सच्चा व्रत

वीरावती यह सुनकर अत्यंत दुखी हो गई। उसने सच्चे मन से देवी पार्वती से प्रार्थना की —
“मां! मुझसे गलती हो गई। मुझे क्षमा करें। मुझे बताइए कि मैं कैसे अपने पति का जीवन वापस पा सकती हूँ?”

माता पार्वती उसकी भक्ति देखकर प्रकट हुईं और बोलीं —
“वीरावती, अगर तुम पूरे वर्ष भक्ति और संयम से करवा चौथ का व्रत करती रहो, तो तुम्हारे पति को नया जीवन मिल जाएगा।”

वीरावती ने माता के आदेशानुसार पूरे 12 महीनों तक तप, व्रत और भक्ति की। अगले वर्ष जब करवा चौथ का दिन आया, उसने पूरे विधि-विधान से व्रत किया।

रात को जब उसने श्रद्धा से चाँद को अर्घ्य दिया और व्रत खोला, तभी उसके पति ने आँखें खोलीं
उसका चेहरा फिर से जीवन से भर उठा। वीरावती की आंखों से खुशी के आँसू बह निकले।

तब माता पार्वती ने आशीर्वाद दिया —

“हे वीरावती, तुम्हारे सच्चे मन और भक्ति से तुम्हारा पति जीवन पा गया। जो स्त्री इसी श्रद्धा से करवा चौथ का व्रत रखेगी, उसका सुहाग सदा अटल रहेगा।”


🌕 करवा चौथ का आध्यात्मिक महत्व

  • यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और निष्ठा को और गहरा करता है।
  • यह केवल शारीरिक उपवास नहीं, बल्कि आध्यात्मिक तप और मानसिक दृढ़ता का प्रतीक है।
  • करवा चौथ भारतीय संस्कृति में स्त्री की शक्ति, त्याग और आस्था का अद्भुत उदाहरण है।
  • माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से दीर्घायु, समृद्धि और दाम्पत्य सुख प्राप्त होता है।

🕯️ पूजा विधि संक्षेप में

  1. प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  2. सास द्वारा दिया गया सर्गी खाकर दिनभर निर्जला उपवास करें।
  3. शाम को करवा, दीया, मिट्टी का दीपक और पूजा की थाली सजाएँ।
  4. सुहागिन स्त्रियाँ एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं।
  5. चंद्रमा के उदय पर छलनी से चाँद और फिर पति का चेहरा देखकर अर्घ्य दें।
  6. पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत का समापन करें।

🌸 कथा से शिक्षा

  • छल-कपट से किया गया कर्म कभी शुभ नहीं होता।
  • सच्ची भक्ति और श्रद्धा से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं।
  • व्रत का उद्देश्य केवल उपवास नहीं, बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि है।
  • यह पर्व दाम्पत्य जीवन में विश्वास, प्रेम और समर्पण की नींव रखता है।

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